सरकारी अस्पताल से भी खराब सुविधा अब आपको प्राइवेट अस्पतालों में मिलेगी कैसे समझ लीजिए.
1. सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों के पैकेज एक समान है, लेकिन सरकारी अस्पताल में डॉक्टर एवं स्टाफ की तनख्वाहों और दवाइयों का खर्चा सरकार उठाती है, लेकिन प्राइवेट में ये सब अस्पताल को उठाना पड़ता है तो क्या वो आपको अच्छी दवाइयाँ, साफ सुथरा अस्पताल, 24 घंटे स्टाफ व डॉक्टर उपलब्ध करा पाएगा? नहीं कतई नहीं
2. चूंकि पैकेज तय हैं और आपके मरीज़ को यदि इमरजेंसी में महंगी दवाइयां की आवश्यकता हुई तो उस पैकेज में उपलब्ध हों पाएंगी?
नहीं कतई नहीं
3. राईट टु हेल्थ के अनुसार आप मरीज़ से महंगी दवाइयां बाहर से मरीज़ से मंगवा नहीं सकते चाहे उसको जरूरत हो, आप को इलाज उसी तय पैकेज में करना है, तो मरीज़ का क्या होगा?
उसको वो ही सस्ती एवं घटिया दवाइयां मिलेंगी
4. क्या सरकार ने पैकेज के अतिरिक्त होने वाले ख़र्चे का कोई प्रावधान किया हैं?
जी नहीं
5. अगर आप के पास पैसा हैं भी सही तो और आप चाहें की पैसा दे के इलाज करा ले, तो भूल जाइए डॉक्टर पैसे लेकर भी इलाज नहीं कर सकता क्यूंकि सरकारी कमिटी अस्पताल और डाक्टर पर कार्यवाही कर सकती हैं।
तो बताइए नुकसान किसका हुआ? – आपका
6. आप प्राइवेट अस्पतालों में फ्री इलाज के लिए जाते हैं या तुरंत और अच्छे इलाज के लिए?
अच्छे के लिए
7. क्या नयी और महंगी तकनीक वाले साधन आप के लिए पैसा देकर भी उपलब्ध होंगे?
नहीं कभी नहीं
8. आपको स्वास्थ्य का अधिकार दिया है या अच्छे इलाज का अधिकार छीन लिया हैं?
अच्छे इलाज का अधिकार छीन लिया है
9. सरकार को इलाज की गुणवत्ता से मतलब है या सिर्फ फ्री देने से मतलब है?
सिर्फ फ्री देने से मतलब और वोट बैंक साधना
10. सरकार अपने वंचित वर्ग के वोट बैंक के लिए समाज के प्रबुद्ध और समृद्ध वर्ग की आवश्यकताओं के लिए वर्षों की मेहनत से विकसित निजी चिकित्सा क्षेत्र का विनाश कर रही है।